मेदिनीनगर: झारखंड शिक्षा परियोजना, पलामू के तत्वावधान में शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बुधवार को मेदिनीनगर स्थित टाउन हॉल में जिले के सभी उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि अब सरकारी स्कूलों का हर तीन महीने में मूल्यांकन किया जाएगा। इस कार्यशाला में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, विद्यालयों की बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों में सुधार लाने पर गहन मंथन हुआ। पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने सख्त लहजे में कहा कि सरकारी विद्यालयों को अब पूरी गंभीरता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा क्योंकि प्रशासन प्रत्येक विद्यालय से हर वर्ष बेहतर परिणाम की अपेक्षा रखता है।
उपायुक्त ने इस दौरान घोषणा की कि विद्यालयों का मूल्यांकन केवल शैक्षणिक प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें विद्यालय की स्वच्छता, अनुशासन, विद्यार्थियों की उपस्थिति और अन्य गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि जिन स्कूलों में कमियां पाई जाएंगी, वहां सुधार के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। उपायुक्त ने शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त जावेद हुसैन ने बुनियादी सुविधाओं पर जोर देते हुए आश्वासन दिया कि जिन विद्यालयों में पेयजल, शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी होगी, जिला प्रशासन उन्हें दूर करने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगा।
कार्यशाला में शिक्षकों से नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने की अपील की गई ताकि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सके। जिला शिक्षा पदाधिकारी सौरभ कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने भी शिक्षकों को विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पूरे कार्यक्रम का संचालन एडीपीओ अंबुजा पांडेय द्वारा किया गया, जिसमें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया। जिला प्रशासन की इस नई मूल्यांकन नीति से पलामू में शिक्षा व्यवस्था के स्वरूप में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
एक टिप्पणी भेजें