झारखंड के पलामू जिले में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पलामू श्रम विभाग ने हरिहरगंज और पिपरा प्रखंड क्षेत्रों में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर एक विशेष जांच और सघन छापेमारी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान विभिन्न होटलों और ढाबों में काम करने को मजबूर कुल 8 बाल श्रमिकों को सकुशल रेस्क्यू कर मुक्त कराया गया है। यह अभियान जिले में बाल अधिकार संरक्षण और बाल मजदूरी खात्मे की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
होटलों में बर्तन धोने और साफ-सफाई को मजबूर थे मासूम
पलामू के श्रम अधीक्षक अमित कुमार चौधरी के नेतृत्व में बुधवार को यह विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया। श्रम अधीक्षक ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुक्त कराए गए सभी बच्चों की उम्र महज 8 वर्ष से लेकर 13.5 वर्ष के बीच है। पढ़ाई-लिखाई की इस कच्ची उम्र में इन मासूम बच्चों से होटलों तथा ढाबों में वेटर का कार्य, ग्राहकों की जूठी प्लेटें उठाने और भारी साफ-सफाई जैसे अमानवीय कार्य कराए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
बाल श्रम कराने वाले संचालकों पर दर्ज हुई प्राथमिकी
बाल मजदूरी कराने वाले दोषियों पर प्रशासन ने सख्त कानूनी चाबुक चलाया है। श्रम अधीक्षक श्री चौधरी ने स्पष्ट किया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना एक गंभीर दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी नियोजकों के विरुद्ध 6 माह से लेकर 2 वर्ष तक की सजा अथवा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों का प्रावधान है। इसी कड़ी में, सख्त कदम उठाते हुए बाल श्रमिकों से काम करवाने वाले संबंधित संचालकों के विरुद्ध हरिहरगंज एवं पिपरा थाना में प्राथमिकता के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी गई है।
बच्चों का सही स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय है
प्रशासन का उद्देश्य केवल बच्चों को मुक्त कराना ही नहीं है, बल्कि उनके सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करना भी है। अधिकारियों के अनुसार, मुक्त कराए गए सभी बच्चों का जल्द ही नजदीकी विद्यालय में नामांकन कराया जाएगा और साथ ही उनके परिवार के उचित पुनर्वास की भी कार्रवाई की जाएगी ताकि वे दोबारा इस दलदल में न फंसे। इस छापामारी अभियान में हरिहरगंज, हुसैनाबाद एवं सदर-मेदिनीनगर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों के साथ-साथ जिला समन्वयक अग्रगति पलामू एवं अन्य विभागीय कर्मी भी मुस्तैदी से मौजूद थे। श्रम अधीक्षक ने आम जनता को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बाल श्रम केवल एक कानूनी अपराध ही नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। बच्चों का सही स्थान कोई कार्यस्थल या ढाबा नहीं, बल्कि विद्यालय की कक्षाएं हैं। समाज के सुनहरे भविष्य के लिए हम सभी नागरिकों को बाल श्रम के विरुद्ध अत्यधिक जागरूक और संवेदनशील होने की आवश्यकता है।
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