रांची मेदांता अस्पताल की लचर व्यवस्था से मरीज परेशान; लैब रिपोर्ट और डिस्चार्ज में देरी के लग रहे आरोप



रांची: शहर के प्रतिष्ठित अस्पतालों में शुमार मेदांता हॉस्पिटल, इन दिनों अपनी खराब प्रबंधन व्यवस्था को लेकर मरीजों और उनके परिजनों के निशाने पर है। हाल ही में गूगल रिव्यूज और सोशल मीडिया पर कई मरीजों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों के अच्छे होने के बावजूद, अस्पताल का लैब विभाग और प्रशासनिक तालमेल पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

लैब रिपोर्ट के लिए हफ्तों का इंतजार

एक पीड़ित मरीज (विमला देवी) ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि अस्पताल का लैब विभाग बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के लिए दिए गए सैंपल कई बार बर्बाद कर दिए जाते हैं और रिपोर्ट देने में एक हफ्ते से भी अधिक का समय लगाया जाता है। विशेष रूप से दूर-दराज के शहरों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक है, क्योंकि उन्हें सिर्फ एक रिपोर्ट के लिए कई दिनों तक शहर में रुकना पड़ता है।

एडमिशन और डिस्चार्ज में भारी अव्यवस्था

अस्पताल के प्रबंधन पर केवल लैब ही नहीं, बल्कि एडमिशन और डिस्चार्ज प्रक्रिया में भी देरी के आरोप लगे हैं। एक अन्य यूजर (पीयूष राज) ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने (Admission) की प्रक्रिया जितनी जटिल है, उससे कहीं ज्यादा परेशानी डिस्चार्ज के समय होती है। मरीज के परिजनों का कहना है कि स्टाफ के बीच समन्वय (Coordination) की भारी कमी है, जिसके कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है।

अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया

इन शिकायतों के बढ़ते देख मेदांता टीम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए खेद जताया है। प्रबंधन ने प्रभावित मरीजों से सीधे संपर्क करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए फीडबैक ईमेल आईडी पर विवरण साझा करने का अनुरोध किया है। हालांकि, मरीजों का कहना है कि केवल आश्वासन के बजाय धरातल पर सुधार की जरूरत है।

मुख्य समस्याएं जो सामने आईं:

• लैब रिपोर्ट में देरी: रिपोर्ट मिलने में 7 दिनों से अधिक का समय।
• सैंपल का नुकसान: मरीजों के सैंपल्स को सही से न संभालना।
• स्टाफ कोऑर्डिनेशन: अलग-अलग विभाग के कर्मचारियों के बीच तालमेल का अभाव।
• बाहरी मरीजों की फजीहत: दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को रुकने और रिपोर्ट के लिए अधिक खर्च और समय का नुकसान।

स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर समय रहते मेदांता प्रबंधन ने इन बुनियादी सुविधाओं में सुधार नहीं किया, तो अस्पताल की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ सकता है।

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