निलंबित मामलों में अत्यधिक देरी को लेकर लातेहार जिले के ग्रामीणों का आक्रोश

 अब आंदोलन का रूप ले चुका है। बरवाडीह के जिला परिषद सदस्य कन्हाई सिंह के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च से शुरू हुई 10 दिवसीय पदयात्रा सोमवार को जिला समाहरणालय पहुँचकर संपन्न हुई। विभिन्न गाँवों और प्रखंडों से गुजरते हुए इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।
कन्हाई सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जिले में वन अधिकार दावों के निष्पादन में भारी शिथिलता बरती जा रही है। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कुल 7384 दावों में से 3599 दावे आज भी लंबित हैं, जिनमें लगभग 1800 व्यक्तिगत और शेष सामुदायिक दावे शामिल हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकार पत्र जारी होने के बावजूद रकबा (क्षेत्रफल) में कटौती की जा रही है या अधूरे अधिकार दिए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनके संवैधानिक हक का उल्लंघन है।

आंदोलनकारियों ने वन विभाग और जिला प्रशासन पर पेसा कानून, जैव विविधता कानून और भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रावधानों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर उत्तर कोयल परियोजना और पलामू टाइगर रिजर्व के नाम पर उनके पारंपरिक जल, जंगल और जमीन से उन्हें बेदखल करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि विरोध करने वाले ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं ताकि उन्हें डराया जा सके।

अंत में, एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त और अनुमंडल पदाधिकारी को 10 सूत्री मांग पत्र सौंपते हुए कड़ी चेतावनी दी। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में लंबित दावों का शीघ्र निपटारा, फर्जी मुकदमों की वापसी, ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी परियोजना पर रोक और उत्तर कोयल परियोजना को निरस्त करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि यदि 60 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे 'घेरा डालो, डेरा डालो' आंदोलन के साथ उग्र चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।

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