जमशेदपुर: 11 नवजातों की मौत पर प्रशासन सख्त, DC बोले- "यह विफलता है, आकस्मिक मौत नहीं"


जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के स्वास्थ्य ढांचे में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। घाटशिला अनुमंडलीय अस्पताल के शिशु केयर यूनिट (SNCU) में पिछले एक वर्ष के भीतर 11 नवजात बच्चों की असामयिक मृत्यु ने जिला प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त (DC) कर्ण सत्यार्थी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे व्यवस्था की बड़ी विफलता करार दिया है।

मामले की केस-बाय-केस होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल और संबंधित चिकित्सा पदाधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मौतों को केवल 'आकस्मिक' मानकर टाला नहीं जा सकता। उपायुक्त ने आदेश दिया है कि सभी 11 मामलों की विस्तृत और केस-बाय-केस समीक्षा की जाए। जांच का मुख्य केंद्र निम्नलिखित बिंदु होंगे:
 * क्या इलाज में देरी हुई थी?
 * क्या अस्पताल में विशेषज्ञों या आवश्यक दवाओं का अभाव था?
 * क्या यह स्वास्थ्य कर्मियों की मानवीय लापरवाही का परिणाम है?

लापरवाह कर्मियों पर गिरेगी गाज

समीक्षा के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी और स्टाफ की संवेदनहीनता की बातें भी सामने आईं। DC ने निर्देश दिया है कि शिशु वार्ड में तैनात स्टाफ के ड्यूटी रोस्टर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति की दैनिक मॉनिटरिंग की जाए। यदि कोई भी कर्मी अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह पाया गया, तो उसे तत्काल प्रभाव से हटाकर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

गिरता लिंगानुपात: अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रडार
बैठक में उपायुक्त ने जिले के कुछ क्षेत्रों, विशेषकर पटमदा (864) और घाटशिला (867) में गिरते लिंगानुपात पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई है कि इन क्षेत्रों में अवैध लिंग जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर और झोलाछाप चिकित्सक सक्रिय हो सकते हैं।
 * छापेमारी के निर्देश: संबंधित अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को इन केंद्रों पर औचक छापेमारी करने और दोषी पाए जाने पर उन्हें तुरंत सील करने का निर्देश दिया गया है।

'मिशन मोड' में स्वास्थ्य सेवाएं

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने चेतावनी दी है कि अब जिले की स्वास्थ्य सेवाएं 'मिशन मोड' पर चलेंगी। आने वाले दिनों में सभी स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में नवजात शिशुओं की मृत्यु के ऐसे मामले दोबारा सामने आते हैं, तो संबंधित MOIC (चिकित्सा पदाधिकारी प्रभारी) की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।


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