पलामू के बसौरा फार्म में आकार ले रहा आधुनिक मल्टीलेयर फार्मिंग मॉडल, किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगी यह पहल


पलामू: झारखंड के पलामू जिले में कृषि और किसानों की आजीविका को एक नई और आधुनिक दिशा देने के उद्देश्य से नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड स्थित बसौरा फार्म में "आधुनिक मल्टीलेयर फार्मिंग मॉडल" विकसित किया जा रहा है। शनिवार को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इस निर्माणाधीन महत्वाकांक्षी परियोजना का स्थल निरीक्षण किया और प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और संवेदकों को कड़े निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के मानकों के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। उपायुक्त ने विश्वास जताया कि यह मल्टीलेयर फार्मिंग मॉडल पलामू के कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी युग की शुरुआत करेगा, जिससे किसानों को कम भूमि में अधिक उत्पादन और आय के विभिन्न स्रोत विकसित करने का व्यावहारिक अवसर मिलेगा।

इस एकीकृत परियोजना के तहत कृषि, बागवानी और पशुपालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को एक ही परिसर में संकलित किया जा रहा है ताकि भविष्य में इसे समेकित कृषि प्रणाली के एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सके। निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सब्जी नर्सरी, शेड नेट हाउस, पॉलीहाउस, मशरूम स्पॉन यूनिट, औषधीय उद्यान और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती की तैयारियों का जायजा लिया। इसके अलावा, यहाँ 5 टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज, बड़े तालाब, फिश-कम-डक फार्मिंग, दाल मिल और 400 लेयर मुर्गियों की पोल्ट्री यूनिट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने तालाब में पूरे वर्ष जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 'पॉड लाइनर' अधिष्ठापन करने और सिंचाई व्यवस्था को पुख्ता बनाने के निर्देश दिए ताकि किसी भी मौसम में खेती प्रभावित न हो।

परियोजना के पूर्ण होने के बाद बसौरा फार्म जिले के किसानों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जहाँ उन्हें आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। यहाँ किसान न केवल खेती के नए तरीके सीखेंगे, बल्कि मछली पालन, बकरी पालन और पोल्ट्री जैसी गतिविधियों से अपनी आजीविका को सुदृढ़ करने के गुण भी सीखेंगे। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले में कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त जावेद हुसैन, जिला अभियंता लाल बिहारी यादव और जिला गव्य विकास पदाधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने इस मॉडल को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय पर जोर दिया।

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