छतरपुर (पलामू): पलामू जिले के छतरपुर नगर पंचायत अंतर्गत जपला रोड इन दिनों अव्यवस्था का केंद्र बन गया है, जहाँ ऑटो चालकों द्वारा मुख्य सड़क पर किए गए अवैध कब्जे ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़क के बीचों-बीच और दोनों किनारों पर बेतरतीब ढंग से वाहनों को खड़ा करने की वजह से यहाँ दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों का निकलना भी दूभर हो गया है। स्थिति इस कदर विकराल हो चुकी है कि महज सौ मीटर की दूरी तय करने में लोगों को घंटों का समय लग रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या से पूरी तरह बेखबर नजर आ रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि छतरपुर से पहाड़ी, खैंद्र, लरमी, लठैया, कालापहाड़ और जपला मार्ग पर चलने वाले टेंपू चालक ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से वाहन पार्क कर रहे हैं। जपला रोड स्थित राम बाबू के होटल से लेकर बाइक शोरूम तक का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ सड़क के दोनों तरफ दो से तीन कतारों में ऑटो खड़े कर दिए जाते हैं। इस अवैध पार्किंग के कारण मुख्य मार्ग की चौड़ाई इतनी कम हो गई है कि यहाँ से बड़े वाहनों का गुजरना लगभग नामुमकिन हो जाता है, जिससे हर समय दुर्घटना का भय बना रहता है और व्यापारिक गतिविधियाँ भी प्रभावित हो रही हैं।
इस अनियंत्रित जाम का सबसे दुखद और बुरा प्रभाव स्कूली बच्चों और गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है क्योंकि बच्चों से भरी स्कूल बसें रोजाना घंटों ट्रैफिक में फंसी रहती हैं, जिसके कारण छात्र समय पर स्कूल नहीं पहुँच पा रहे हैं। इतना ही नहीं, आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस चालकों को भी इस भीड़भाड़ वाले रास्ते से निकलने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। जीवन रक्षक सेवाओं के इस तरह बाधित होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है।
सड़क पर व्याप्त इस अराजकता को देखते हुए स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक ऑटो के लिए एक निश्चित और व्यवस्थित स्टैंड नहीं बनाया जाता और सड़क पर अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें इस 'रोजाना के नरक' से मुक्ति नहीं मिली, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, ताकि प्रशासन की नींद खुल सके और यातायात व्यवस्था को सुधारा जा सके।
एक टिप्पणी भेजें