पलामू में सरकारी संपत्तियों का कायाकल्प: खाली पड़े और जर्जर भवनों का होगा जनहित में बेहतर उपयोग


मेदिनीनगर: पलामू जिला प्रशासन अब शहर में लंबे समय से बेकार, निष्क्रिय और जर्जर पड़े सरकारी भवनों को नए सिरे से उपयोगी बनाने की बड़ी तैयारी में जुट गया है। इसी सिलसिले में शुक्रवार को पलामू के उपायुक्त (डीसी) दिलीप प्रताप सिंह शेखावत और नगर आयुक्त जावेद हुसैन ने मेदिनीनगर के विभिन्न सरकारी परिसरों का एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया। इस संयुक्त दौरे का मुख्य उद्देश्य शहर के कीमती सरकारी ढांचों और जमीनों को चिन्हित कर उन्हें आम जनता के हित में पुनर्विकसित करना है।

इस विशेष निरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पुराने मलेरिया भवन, सदर प्रखंड कार्यालय, खनिज भवन, नूतन केंद्र भवन सहित आसपास की खाली पड़ी सरकारी जमीनों का बारीकी से जायजा लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इन सभी भवनों की वर्तमान स्थिति, उनकी मरम्मत की तात्कालिक जरूरतों और भविष्य में उनके बेहतर इस्तेमाल को लेकर विस्तृत चर्चा की। उपायुक्त ने इस दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि जो भवन मरम्मत के बाद इस्तेमाल किए जा सकते हैं, उन्हें जल्द से जल्द ठीक कर जनहित के कार्यों में लाया जाएगा। इसके साथ ही, जो भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और रहने योग्य नहीं हैं, उन्हें नियमसंगत तरीके से कंडम घोषित कर वहां नए निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण पहल पर बात करते हुए नगर आयुक्त जावेद हुसैन ने कहा कि एक सुनियोजित और योजनाबद्ध तरीके से इन सरकारी परिसरों का इस्तेमाल करके स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ तथा मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि नूतन केंद्र के समीप खाली पड़ी भूमि और परिसरों का उपयोग इंजीनियरिंग लाइन से जुड़े विभिन्न सरकारी कार्यालयों को एक ही छत के नीचे शिफ्ट करने के लिए किया जा सकता है। इससे न केवल आम जनता को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कामकाज में भी काफी तेजी आएगी। कुल मिलाकर, पलामू प्रशासन की इस अनूठी पहल से जहां एक ओर सरकारी संपत्तियों की बर्बादी रुकेगी, वहीं दूसरी ओर मेदिनीनगर शहर के सुनियोजित विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी।

Post a Comment

और नया पुराने