JTET परीक्षा में मगही-भोजपुरी को बाहर करने पर भड़की भाजपा, पलामू और गढ़वा के छात्रों के साथ सौतेले व्यवहार का लगाया आरोप


झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से मगही और भोजपुरी को हटाए जाने के फैसले ने पलामू प्रमंडल में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। मेदिनीनगर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की। डाल्टनगंज विधायक आलोक चौरसिया और पांकी विधायक डॉ. शशि भूषण मेहता ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार का यह निर्णय पलामू और गढ़वा के हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन दोनों लोकप्रिय क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा के लैंग्वेज पेपर में पुनः शामिल नहीं करती, तब तक भाजपा चुप नहीं बैठने वाली है।

नेताओं का तर्क है कि पलामू और गढ़वा जिलों में मगही और भोजपुरी जनमानस की मुख्य भाषाएं हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर यहां के छात्रों को शिक्षक बनने से रोकना चाहती है। पांकी विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाने की बात कही और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध के बावजूद सरकार ने इसे अनसुना कर दिया है। भाजपा जिलाध्यक्ष अमित तिवारी ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के भेदभावपूर्ण फैसलों से क्षेत्रीय भाषाओं के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।

छात्रों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए अब भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने सड़क पर उतरने का मन बना लिया है। भाजयुमो जिलाध्यक्ष विपिन गुप्ता ने घोषणा की है कि शुक्रवार को दिन के 10:30 बजे से पलामू और गढ़वा के छात्रों के समर्थन में एक विशाल आक्रोश प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ नेता श्याम नारायण दुबे, शिव मिश्रा और विजय ठाकुर समेत कई अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में इस आंदोलन से जुड़ने की अपील की। भाजपा का कहना है कि वे पलामू प्रमंडल के छात्रों के साथ हो रहे इस भाषाई अन्याय के खिलाफ अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।

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