मेदिनीनगर (पलामू): पलामू समाहरणालय परिसर में आयोजित 'जन समाधान दिवस' के दौरान मानवता और प्रशासनिक जिम्मेदारी की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। अक्सर सरकारी दफ्तरों की चौखट पर फरियादियों को भटकते देखा जाता है, लेकिन पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने अपनी कार्यशैली से यह साबित कर दिया कि संवेदनशील प्रशासन कैसा होना चाहिए। मामला तब सामने आया जब मेदिनीनगर की रहने वाली एक दिव्यांग महिला शीला कुमारी अपनी समस्या लेकर उपायुक्त से मिलने पहुँचीं, लेकिन शारीरिक अक्षमता के कारण वह समाहरणालय की सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ थीं।
जैसे ही इस बात की सूचना उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत को मिली, उन्होंने प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना चल रहे कार्यक्रम को तुरंत रोक दिया। उपायुक्त खुद अपने कक्ष से निकलकर नीचे सीढ़ियों तक पहुँचे और वहीं जमीन पर महिला के पास बैठकर बड़ी आत्मीयता से उनकी समस्याओं को सुना। अधिकारी का यह व्यवहार देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए। उपायुक्त ने न केवल महिला की पीड़ा सुनी, बल्कि मौके पर उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले का तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने भावुक होकर महिला को भरोसा दिलाया कि अब उन्हें दोबारा कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनका काम घर बैठे ही पूरा कर लिया जाएगा।
उपायुक्त का यह मानवीय चेहरा अब सोशल मीडिया पर खूब सराहना बटोर रहा है। इसे महज एक प्रशासनिक कदम के रूप में नहीं, बल्कि 'गुड गवर्नेंस' और इंसानियत की सच्ची पहचान के रूप में देखा जा रहा है। एक बड़े ओहदे पर बैठकर जमीन पर फरियादी के साथ बैठना समाज को यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में जनता की सेवा ही सर्वोपरि है। इस घटना ने आम जनता के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है, साथ ही यह अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।
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