मेदिनीनगर: झारखंड के पलामू जिले में भीषण गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल की समस्या विकराल रूप लेने लगी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने परिसदन भवन में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मंत्री ने जिले में गहराते जल संकट को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यपालक अभियंता जेएसएन होरो को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे कागजी कार्रवाई छोड़ धरातल पर उतरें और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाना सुनिश्चित करें। मंत्री ने आगाह किया कि आने वाले डेढ़ माह जिले के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित होने वाले हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगभग 60 फीट तक नीचे खिसक गया है, जो एक चिंताजनक संकेत है।
समीक्षा के दौरान मंत्री ने विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई गांवों में घरों के पास चापाकल होने के बावजूद लोगों को पानी के लिए एक किलोमीटर दूर तक भटकना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि जिले के सभी खराब पड़े चापाकल की युद्ध स्तर पर मरम्मत कराई जाए। जब बैठक में फंड की कमी का मुद्दा उठा, तो मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष अनटाइड फंड के तहत आवंटित किए गए एक करोड़ रुपये का उपयोग इस संकट से निपटने के लिए किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर जनता को प्यासा नहीं छोड़ा जा सकता।
जिले में 'हर घर नल जल' योजना की प्रगति भी समीक्षा के घेरे में रही, जहाँ आंकड़े संतोषजनक नहीं पाए गए। मंत्री ने बताया कि जिले के 3,65,812 घरों में नल कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन अब तक केवल 1,93,575 घरों तक ही पानी पहुँच सका है। लगभग 1,72,237 कनेक्शन अब भी लंबित हैं, जिसका अर्थ है कि योजना की प्रगति मात्र 52.91 प्रतिशत ही रही है। आंकड़ों के अनुसार, जिले की 4,926 लघु ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं में से 4,207 पूर्ण हो चुकी हैं, जिनमें से 3,713 चालू हैं और 494 योजनाएं बंद पड़ी हैं। इसके अलावा, जिले के कुल 27,037 चापाकलों में से 3,387 खराब पाए गए हैं। मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुदूरवर्ती इलाकों में चापाकल खराब होने की सूचना विभाग को समय पर नहीं मिल पाती, जिसे सुधारने के लिए एक प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
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