मेदिनीनगर: झारखंड के पलामू जिले में बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां पाटन निवासी अविनाश कुमार गौतम को गलत बिलिंग के कारण भारी मानसिक और आर्थिक तनाव झेलना पड़ा। ऊर्जा मित्र की गंभीर गलती की वजह से उपभोक्ता का बिजली बिल 44 हजार रुपये तक पहुँच गया था, जिसे लेकर क्षेत्र में काफी चर्चा थी। इस मामले की गूँज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुँचने के बाद उनके हस्तक्षेप और पलामू उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के कड़े रुख ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। डीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यपालक अभियंता को तत्काल उपभोक्ता के घर जाकर समस्या का समाधान करने और मामले के जिम्मेदार ऊर्जा मित्र से स्पष्टीकरण मांगने का सख्त निर्देश दिया।
प्रशासनिक सक्रियता के चलते डालटनगंज विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार स्वयं पाटन थाना क्षेत्र के मेराल गाँव पहुंचे और पूरे मामले की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो गया कि बिल में हुई भारी गड़बड़ी पूरी तरह से ऊर्जा मित्र की तकनीकी गलती और लापरवाही का परिणाम थी। विभाग ने अपनी त्रुटि स्वीकार करते हुए त्वरित कार्यवाही की और उपभोक्ता के बिल में भारी संशोधन किया। जांच के बाद 44 हजार रुपये के भारी-भरकम बिल को संशोधित कर वास्तविक देय राशि के रूप में मात्र 5700 रुपये निर्धारित किए गए, जिससे पीड़ित परिवार ने बड़ी राहत की सांस ली है।
इस पूरी घटना ने बिजली विभाग की बिलिंग प्रणाली और ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले ऊर्जा मित्रों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग द्वारा बिल में कुल 38 हजार रुपये की कटौती की गई है और भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए दोषी ऊर्जा मित्र के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन की इस त्वरित संवेदनशीलता ने आम जनता के बीच सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास को और मजबूत किया है, साथ ही यह संदेश भी दिया है कि उपभोक्ता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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