पलामू में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों पर गहराया संकट, समय पर रक्त न मिलने से 150 मासूमों की जान जोखिम में


मेदिनीनगर: झारखंड के पलामू जिले में थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों के लिए जीवन रक्षा का आधार माना जाने वाला रक्त अब दुर्लभ होता जा रहा है, जिससे जिले में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, जिले में करीब 150 बच्चे इस गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, जिन्हें जीवित रहने के लिए हर 15 से 20 दिन में अनिवार्य रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से केवल 60 से 70 बच्चों को ही समय पर रक्त मिल पा रहा है। शेष बच्चों को रक्त की भारी कमी के कारण इलाज में असहनीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है बल्कि उनके जीवन पर भी हर पल खतरा मंडरा रहा है।

रक्त की इस भारी किल्लत के पीछे एक मुख्य तकनीकी कारण NAT (Nucleic Acid Test) की अनिवार्यता और स्थानीय स्तर पर इसकी सुविधा का अभाव है। गौरतलब है कि चाईबासा में पिछले वर्ष संक्रमित रक्त चढ़ने से पांच बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने की दुखद घटना के बाद सरकार ने रक्त की सुरक्षा के लिए NAT टेस्ट को अनिवार्य कर दिया था। यह आधुनिक परीक्षण पद्धति एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों को शुरुआती चरण में ही पकड़ने में सक्षम है, जिससे मरीजों को सुरक्षित रक्त सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि, पूरे झारखंड में यह सुविधा केवल रांची स्थित रिम्स में ही उपलब्ध है, जिसके कारण पलामू से ब्लड सैंपल जांच के लिए बाहर भेजने पड़ते हैं और इस लंबी प्रक्रिया में होने वाली देरी अक्सर आपातकालीन स्थितियों में मरीजों के लिए घातक साबित हो रही है।

जिला स्तर पर इस संकट का एक अन्य बड़ा कारण स्वैच्छिक रक्तदान को लेकर समाज में व्याप्त जागरूकता की कमी और विभिन्न भ्रांतियां हैं। वरिष्ठ लैब तकनीशियन मोहम्मद अनवर आलम के अनुसार, लोगों में रक्तदान को लेकर डर और गलतफहमियां आज भी बरकरार हैं, जिसके कारण ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक जमा नहीं हो पाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि जिले में ही लगभग 25 लाख रुपये की लागत वाली NAT मशीन की व्यवस्था कर दी जाए और व्यापक स्तर पर रक्तदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो थैलेसीमिया पीड़ित इन मासूम बच्चों को एक नया जीवनदान मिल सकता है। फिलहाल, प्रशासनिक देरी और संसाधनों के अभाव के बीच पलामू के ये बच्चे और उनके परिजन हर दिन एक नई जंग लड़ने को मजबूर हैं।

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