चैनपुर (पलामू): प्रमंडलीय आयुक्त कुमुद सहाय ने शुक्रवार को राजकीय बुनियादी विद्यालय, चैनपुर का औचक निरीक्षण किया, जहां शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक अनुशासन की पोल खुल गई। निरीक्षण के दौरान शैक्षणिक कुव्यवस्था, अभिलेखों में हेराफेरी और मध्याह्न भोजन के भंडारण में गंभीर लापरवाही देख आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी कि विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई शिक्षकों की पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसमें किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयुक्त ने जब कक्षाओं का भ्रमण किया तो स्थिति काफी चिंताजनक पाई गई। कई शिक्षक अपनी ड्यूटी से नदारद थे, जिसके कारण छात्राएं बरामदे और कक्षाओं में शोरगुल कर रही थीं। शैक्षणिक स्तर की जांच के लिए जब आयुक्त ने छात्राओं से सामान्य ज्ञान के सरल प्रश्न पूछे, तो अधिकांश छात्राएं संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकीं। इस पर प्राचार्य और शिक्षकों को फटकार लगाते हुए आयुक्त ने कहा कि यदि पठन-पाठन की गुणवत्ता में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो संबंधितों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय के रिकॉर्ड और पंजियों में भारी गड़बड़ी उजागर हुई। उपस्थिति पंजी और मध्याह्न भोजन की स्टॉक पंजी अद्यतन नहीं पाई गई और मार्च महीने के कई कॉलम खाली छोड़े गए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि 13 मार्च को हुए निरीक्षण के दौरान ही 14 मार्च की तारीख में कई छात्राओं को पहले से ही अनुपस्थित दिखाते हुए क्रॉस लगा दिया गया था। आयुक्त ने इसे गंभीर जालसाजी और लापरवाही करार देते हुए कहा कि पंजियों को मनगढ़ंत तरीके से भरना वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता का स्पष्ट प्रमाण है।
मध्याह्न भोजन योजना की जांच में भी स्थिति बदतर मिली। रसोईघर के निरीक्षण में पाया गया कि भंडार गृह में रखे चावल की बोरियों को चूहों ने कुतर दिया था, जिससे खाद्यान्न की स्वच्छता पर सवाल खड़े हो गए। आयुक्त ने निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को मेन्यू के अनुसार पौष्टिक और स्वच्छ भोजन दिया जाए और खाद्यान्न का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करें। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि भोजन की गुणवत्ता में कमी से यदि किसी बच्चे के स्वास्थ्य पर असर पड़ा, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी प्राचार्य की होगी।
विद्यालय परिसर की अनुशासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आयुक्त ने प्राचार्य कक्ष के सामने बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने प्राचार्य को निर्देश दिया कि वे शिक्षकों की गतिविधियों पर पूर्ण नियंत्रण रखें और परिसर में शैक्षणिक वातावरण बहाल करें। इस मौके पर आयुक्त के सचिव बिजय वर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने अभिलेखों की सूक्ष्म जांच में सहयोग किया।
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