झारखंड: 9 दिन बाद भी नहीं डिफ्यूज हुआ दूसरे विश्व युद्ध का शक्तिशाली बम, अब 'बंकर तकनीक' का सहारा लेगी सेना


जमशेदपुर/पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में मिला दूसरे विश्व युद्ध (World War II) के समय का एक जीवित बम प्रशासन और सेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। 

पिछले 9 दिनों से जारी कोशिशों के बावजूद इस 227 किलो (500 पाउंड) वजनी विशालकाय बम को अब तक डिफ्यूज नहीं किया जा सका है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब भारतीय सेना ने इसे सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए 'बंकर तकनीक' अपनाने का फैसला किया है।

सुवर्णरेखा नदी के तट पर मिला था 'अमेरिकी बम'

यह बम बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा-नामुतोलिया में सुवर्णरेखा नदी के तट पर मिला था। शुरुआती जांच के अनुसार, यह अमेरिकी मॉडल का बम है जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किसी विमान से गिराया गया होगा। इतने दशकों तक मिट्टी और बालू के नीचे दबे रहने के बावजूद यह बम आज भी पूरी तरह 'जिंदा' और सक्रिय अवस्था में है, जो बेहद हैरान करने वाली बात है।

क्या है 'बंकर तकनीक' और क्यों है इसकी जरूरत?

बम का वजन और इसकी विनाशक क्षमता इतनी अधिक है कि इसे सामान्य तरीके से डिफ्यूज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसीलिए सेना बंकर तकनीक का इस्तेमाल कर रही है:
 * सुरक्षा घेरा: बम के चारों ओर बालू (रेत) से भरी बोरियों की ऊंची दीवारें खड़ी की जाती हैं।
 * गड्ढे का निर्माण: जमीन के अंदर एक विशेष गड्ढा तैयार किया जाता है ताकि यदि विस्फोट हो, तो उसका दबाव और कंपन जमीन के भीतर ही अवशोषित (absorb) हो जाए।
 * मलबा नियंत्रण: यह तकनीक विस्फोट से निकलने वाले मलबे और शॉकवेव को रिहायशी इलाकों तक पहुँचने से रोकती है।
1 किलोमीटर का इलाका कराया गया खाली
सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। बम स्थल से 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों (विशेषकर पानीपड़ा गांव) को खाली करा लिया गया है।
 * पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई है और बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित है।
 * ऑपरेशन के दौरान क्षेत्र के ऊपर से हेलीकॉप्टर या किसी भी अन्य विमान के उड़ने पर पाबंदी लगा दी गई है।
 * सेना ड्रोन कैमरों की मदद से आसपास के रिहायशी इलाकों की लगातार निगरानी कर रही है।

और भी बम होने की आशंका

स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इस क्षेत्र में जमीन के नीचे ऐसे और भी बम दबे हो सकते हैं। इस इनपुट के बाद, सेना और बम निरोधक दस्ता मेटल डिटेक्टर और आधुनिक उपकरणों की मदद से पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है। फिलहाल, सेना की विशेष टीम पूरी सावधानी के साथ इस 'विंटेज बम' को निष्क्रिय करने की तैयारी में जुटी है।


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