गढ़वा में मत्स्य पालन को मिलेगा नया आयाम: मेराल और भवनाथपुर में 6.40 करोड़ की लागत से बनेंगे मॉडर्न फिश फार्म

झारखंड के गढ़वा जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। भारत सरकार की फिशरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड योजना के तहत राज्य से भेजे गए सात प्रस्तावों में से सर्वाधिक पांच प्रस्ताव अकेले गढ़वा से भेजे गए थे। इनमें से दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है। स्वीकृत परियोजनाओं के तहत मेराल प्रखंड के पिंडरा और भवनाथपुर में दो मॉडर्न फिश फार्म बनाए जाएंगे। इन दोनों अत्याधुनिक परियोजनाओं का निर्माण लगभग 15 से 16 एकड़ भूमि में किया जाएगा, जिस पर करीब 6 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन आधुनिक फार्मों के बनने से जिले में वैज्ञानिक तरीके से मछली उत्पादन को भारी बढ़ावा मिलेगा।

इन नई योजनाओं के धरातल पर उतरने से जिले में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि इन परियोजनाओं के लागू होने से जिले के लगभग 15 से 20 हजार लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकेगा। वर्तमान में जिले के चिनियां और बड़गड़ प्रखंडों में तालाब निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है और बरसात के बाद यहाँ मछली पालन का कार्य विधिवत शुरू कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और धरती आबा जनजातीय गौरव विकास योजना के तहत भी जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में तालाब निर्माण, केज निर्माण और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है।

जिले में मछली पालन की अपार संभावनाओं को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण भी अब काफी जागरूक हो रहे हैं। जिला मत्स्य पदाधिकारी धनराज आर कापसे का मानना है कि विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आगामी दो वर्षों में जिले के 20 से 25 हजार लोग मछली पालन से जुड़ेंगे। विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त कर कई ग्रामीणों ने अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। केतार और डंडई प्रखंड के लाभुकों ने बताया कि वे डोभा और तालाबों में मछली पालन कर एक सीजन में 65 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी कर रहे हैं। इस पूरी मुहिम में 'मत्स्य मित्र' भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

Post a Comment

और नया पुराने