13 साल से पेंशन नहीं मिलने पर भड़क उठा हाईकोर्ट, पलामू डीटीओ (DTO) के वेतन पर लगाई रोक


रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति प्रशासनिक संवेदनहीनता पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को पिछले 13 वर्षों से पेंशन और अन्य बकाया लाभ न मिलने पर गहरी नाराजगी जताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

प्रशासनिक विफलता और अदालत की फटकार

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विभाग की ओर से लगातार की जा रही लापरवाही और टालमटोल के कारण एक बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मी को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ा। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि 13 वर्षों तक पेंशन का भुगतान न होना एक 'गंभीर प्रशासनिक विफलता' है और यह सीधे तौर पर कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

जवाबदेही तय होने तक नहीं मिलेगा वेतन

जस्टिस आनंद सेन ने जवाबदेही तय करते हुए आदेश दिया कि जब तक लंबित पेंशन भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित अधिकारी का वेतन रुका रहेगा। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ कुर्सी पर बैठना नहीं बल्कि जनता और सेवानिवृत्त कर्मियों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।

अदालत के मुख्य निर्देश:

 • वेतन पर रोक: पलामू डीटीओ का वेतन तब तक बाधित रहेगा जब तक बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित नहीं हो जाता।
 • जल्द भुगतान के आदेश: विभाग को निर्देश दिया गया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन और अन्य सभी बकाया राशि का भुगतान बिना किसी देरी के जल्द से जल्द किया जाए।
 • भविष्य के लिए चेतावनी: अदालत ने विभाग को चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस फैसले ने उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है जो सेवानिवृत्त कर्मियों के लाभों को फाइलों में दबाकर रखते हैं।

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