पलामू में 'बाल विवाह मुक्ति रथ' का सफल समापन: 1104 किलोमीटर की यात्रा से थमीं कच्ची उम्र की शादियां


मेदिनीनगर में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से संचालित 'बाल विवाह मुक्ति रथ' अभियान का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। भारत सरकार के 100 दिवसीय गहन जागरूकता कार्यक्रम के तहत पलामू जिला समाज कल्याण विभाग और स्वयंसेवी संस्था 'अग्रगति' के संयुक्त प्रयासों से यह मुहिम पिछले 30 दिनों तक जिले के सुदूर इलाकों में सक्रिय रही। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान द्वारा रवाना किया गया यह रथ पलामू के उन दुर्गम गांवों और कस्बों तक पहुंचने में सफल रहा, जहां आज भी जागरूकता का अभाव है।

इस व्यापक अभियान के दौरान जागरूकता रथ ने कुल 1104 किलोमीटर की दूरी तय की और लगभग 24,150 लोगों को सीधे तौर पर बाल विवाह के खिलाफ एकजुट किया। अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी दृष्टिकोण रहा, जिसके तहत न केवल आम जनता बल्कि समाज के उन वर्गों को भी जोड़ा गया जो विवाह आयोजनों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं। पंडितों, मौलवियों, टेंट संचालकों और बैंड-बाजा समूहों से विशेष अपील की गई कि वे किसी भी विवाह समारोह का हिस्सा बनने से पहले वर-वधु की उम्र की जांच अनिवार्य रूप से करें और कानून का उल्लंघन होने पर अपनी सेवाएं न दें।

अभियान के दौरान शैक्षणिक संस्थानों और ग्राम पंचायतों में विशेष सभाएं आयोजित की गईं, जहां युवाओं और अभिभावकों को बाल विवाह के कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी खतरों से अवगत कराया गया। संस्था के निदेशक किरण शंकर दत्त ने इस पहल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बाल विवाह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि बच्चों को कुपोषण और गरीबी के अंतहीन दुष्चक्र में धकेलने वाला अपराध है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जहां रथ का पहुंचना संभव नहीं था, वहां मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए संदेश पहुंचाया गया, जिससे पलामू के सामाजिक परिवेश में एक सकारात्मक बदलाव की लहर दिखाई दे रही है।

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