पलामू की स्वास्थ्य व्यवस्था ने उजाड़ा हँसता-खेलता परिवार: ममता की बलि चढ़ी, तीन मासूमों के सिर से उठा माँ का साया


मेदिनीनगर (पलामू): पलामू जिले के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता ने एक बार फिर एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है। बेलवाटीकर की रहने वाली आरती कुमारी और उनके अजन्मे बच्चे की MMCH में इलाज के दौरान हुई मौत ने स्थानीय प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गहरा प्रहार किया है। इस हृदयविदारक घटना ने आरती के तीन छोटे बच्चों को अनाथ कर दिया है, जो अब अपनी माँ के वापस आने का इंतज़ार कर रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल और MMCH की घोर लापरवाही ने इस दोहरी मौत की पटकथा लिखी है।

पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर सवालों की बौछार करते हुए पूछा है कि जब मरीज को दोपहर में ही रेफर करने का निर्णय ले लिया गया था, तो उसे तड़के सुबह एनेस्थीसिया देकर खतरे में क्यों डाला गया। सामान्य प्रसव की संभावना होने के बावजूद ऑपरेशन करने के निर्णय और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की पहचान छिपाने की कोशिशों ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। परिजनों का यह भी दावा है कि न्याय मांगने पर उन्हें सांत्वना देने के बजाय पुलिस द्वारा लाठियों से प्रताड़ित किया गया और बिना पोस्टमार्टम के ही प्रक्रिया को रफा-दफा करने की कोशिश की गई।

इस दुखद प्रकरण ने पलामू उपायुक्त के उन दावों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है जिनमें वे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की बात करते हैं। अस्पताल अधीक्षक की चुप्पी और केवल औपचारिक जाँच के आश्वासनों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते उचित इलाज मिला होता, तो आज आरती अपने बच्चों के साथ होती। यह घटना पलामू के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ा धब्बा है, जहाँ मरीज इलाज के भरोसे आते हैं लेकिन लापरवाही के कारण अपनी जान गँवा बैठते हैं।

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