मेदिनीनगर में जल संकट गहराया: इस साल भी नहीं मिलेगा 'सेकंड फेज पाइपलाइन' का पानी, प्रोजेक्ट में बड़ी बाधाएं


मेदिनीनगर। झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल की समस्या एक बार फिर विकराल रूप लेती नजर आ रही है। शहरवासियों को उम्मीद थी कि इस वर्ष 'सेकंड फेज पाइपलाइन' योजना के माध्यम से पानी की किल्लत दूर हो जाएगी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह सपना इस साल भी पूरा होता नहीं दिख रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता आशीष भारद्वाज ने हाल ही में योजना का क्रियान्वयन कर रही कंपनी 'आरके इंजीनियरिंग एंड सेल्स लिमिटेड' के अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ है कि पाइप की अनुपलब्धता और विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने के कारण इस साल पाइपलाइन के जरिए पानी की आपूर्ति संभव नहीं हो पाएगी।

शहर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह तीनों ओर से नदियों से घिरा हुआ है, इसके बावजूद हर साल 47-48 डिग्री की तपती गर्मी में यहां के कई मोहल्ले पूरी तरह सूख जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से 'पानी यात्रा' जैसे आंदोलन किए गए, जिसके परिणाम स्वरूप ₹172 करोड़ की सेकंड फेज पाइपलाइन योजना को मंजूरी मिली थी। हालांकि, कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर रंजीत जी के अनुसार, योजना अब प्रशासनिक शिथिलता की भेंट चढ़ती दिख रही है। नगर निगम क्षेत्र में कुल 476 किलोमीटर पाइप बिछाने की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 212 किलोमीटर का ही टेंडर हुआ है। शेष 264 किलोमीटर की पाइपलाइन को लेकर स्थिति अभी भी अधर में लटकी हुई है, जिस पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

योजना की सुस्त रफ्तार का मुख्य कारण एनएचएआई (NHAI), रेलवे, आरसीडी और पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों से क्लियरेंस न मिलना बताया जा रहा है। विडंबना यह है कि नगर निगम प्रशासन ESR टंकी के निर्माण के लिए जरूरी भूमि तक उपलब्ध कराने में विफल रहा है। इसके साथ ही, इंटेक वेल में प्रस्तावित फिल्टर गैलरी की क्षमता भी आवश्यकता से आधी बताई जा रही है। आशीष भारद्वाज ने जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि फंड मिलने के बावजूद शहर को प्यासा रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन बाधाओं को दूर कर धरातल पर कार्य शुरू नहीं किया गया, तो शहरवासियों के साथ मिलकर एक बार फिर 'पानी यात्रा' की तर्ज पर बड़े आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा।

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