मेदिनीनगर : नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (NPU) में शैक्षणिक सत्र की भारी देरी ने स्नातक सत्र 2022-26 के विद्यार्थियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विश्वविद्यालय की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण चार वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बावजूद अब तक केवल चार सेमेस्टर की परीक्षाएं ही आयोजित हो सकी हैं। एनईपी (NEP) के तहत नामांकित छात्रों का आरोप है कि परीक्षा विभाग की लापरवाही और धीमी रफ्तार की वजह से उनका भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। छात्र इस बात को लेकर बेहद परेशान हैं कि जब समय पर सेमेस्टर परीक्षाएं ही संपन्न नहीं हो पा रही हैं, तो स्नातक की डिग्री कब मिलेगी और परास्नातक (PG) में नामांकन की प्रक्रिया कब शुरू होगी। इस सत्र विलंब के कारण उन विद्यार्थियों को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है जो अन्य तकनीकी या उच्च पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने की योजना बना रहे थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश, उग्र प्रदर्शन की तैयारी
इस गंभीर मुद्दे पर जीएलए कॉलेज के अध्यक्ष रिशु राज दुबे ने कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एनपीयू का परीक्षा विभाग कछुए की चाल से चल रहा है, जिसका सीधा खामियाजा हजारों छात्रों को अपने कीमती साल बर्बाद करके भुगतना पड़ रहा है। छात्र नेताओं ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अविलंब ठोस रणनीति बनाकर परीक्षाओं के आयोजन में तेजी लाए और सत्र को नियमित करने के लिए स्पष्ट निर्णय ले। छात्रों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही परीक्षा कैलेंडर में सुधार नहीं किया गया और सत्र को पटरी पर नहीं लाया गया, तो वे बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि शैक्षणिक व्यवस्था में इस तरह की शिथिलता को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन की पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
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