झारखंड मैट्रिक रिजल्ट 2026: लातेहार से भी पिछड़ा पलामू, राज्य रैंकिंग में आठवें पायदान पर सिमटा


पलामू जिले के लिए इस वर्ष के झारखंड मैट्रिक (JAC 10th Result) परिणाम मिला-जुला प्रभाव लेकर आए हैं। हालाँकि पिछले वर्ष की तुलना में जिले के उत्तीर्ण प्रतिशत में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन राज्य स्तरीय रैंकिंग में पलामू की स्थिति अभी भी निराशाजनक बनी हुई है। लगातार तीसरी बार पलामू शीर्ष पांच जिलों (Top 5 Districts) की सूची से बाहर रहा है और इस साल भी इसे आठवां स्थान ही प्राप्त हुआ है। गौरतलब है कि पड़ोसी जिला लातेहार रैंकिंग में पांचवें स्थान पर रहकर पलामू से काफी आगे निकल गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष पलामू से कुल 34,051 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 33,884 छात्र परीक्षा में शामिल हुए और 32,534 छात्रों ने सफलता हासिल की, जिससे जिले का कुल पास प्रतिशत 96.1 रहा।

पलामू के शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष बेहतर परिणाम के लिए 'ऑनलाइन मार्गदर्शन क्लास' जैसे प्रयास किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका प्रभाव उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा। आलोचकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकारियों की ओर से किए गए ये प्रयास केवल दिखावा साबित हुए। जिले के स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या होने के बावजूद शैक्षणिक माहौल की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर आरोप लग रहे हैं कि उनका ध्यान बेहतर शिक्षा व्यवस्था बनाने के बजाय भवन निर्माण, एमडीएम और प्रशासनिक जोड़-तोड़ पर अधिक रहता है। यही कारण है कि आज भी छात्र स्कूलों से ज्यादा निजी ट्यूशन और कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

राज्य के औसत प्रदर्शन की तुलना में पलामू का प्रदर्शन इस बार भी फीका रहा। जहाँ पिछले वर्ष पलामू का रिजल्ट 94.92 प्रतिशत था, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 96.1 प्रतिशत तो पहुँचा, लेकिन यह राज्य की औसत वृद्धि दर से काफी कम है। जैक (JAC) द्वारा जारी टॉपर्स की सूची में भी पलामू का कोई छात्र राज्य के शीर्ष तीन स्थानों में जगह नहीं बना सका। पलामू के जिला टॉपर ने 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, जबकि राज्य स्तर पर टॉपर्स ने 99.60 प्रतिशत तक का आंकड़ा छुआ है। शिक्षा विभाग के भीतर चल रही गुटबाजी और प्रशासनिक ढिलाई को जिले के इस पिछड़ते प्रदर्शन का मुख्य कारण माना जा रहा है। यदि समय रहते शैक्षिक सुधारों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो पलामू का प्रदर्शन आने वाले वर्षों में और भी गिर सकता है।

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