झारखंड के पलामू जिले में इन दिनों कुओं से लाशें मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसने पूरे मेदिनीनगर और आसपास के इलाकों में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। स्थिति यह हो गई है कि अब किसी के लापता होने की खबर मिलते ही परिजनों की सबसे पहली नजर गांव के सुनसान कुओं पर ही जाती है। पिछले कुछ दिनों में हुई एक के बाद एक वारदातों ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है, जिसे अब स्थानीय स्तर पर 'कुआं कनेक्शन' के नाम से जाना जाने लगा है।
अप्रैल 2026 पलामू के लिए सबसे खतरनाक महीना साबित हो रहा है, जहाँ महज 12 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों से चार शव बरामद किए गए हैं। इस खौफनाक सिलसिले की शुरुआत 20 अप्रैल को बिश्रामपुर के चराई गोदर के पास एक कुएं से हुई, जहाँ एक व्यक्ति का सड़ा-गला शव मिला। इससे पहले 19 अप्रैल को चैनपुर थाना क्षेत्र के चांदो गांव में एक 20 वर्षीय युवती की लाश मिली थी, जो 16 अप्रैल से लापता थी। इसी तरह अप्रैल के शुरुआती हफ्तों में लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की का शव कुएं से मिला था, जिसमें दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई गई थी, जबकि विश्रामपुर इलाके से भी एक युवक का शव बरामद हुआ है।
इन तमाम घटनाओं में एक भयावह समानता यह है कि पीड़ित पहले लापता होता है और कुछ दिनों बाद उसकी लाश किसी गहरे कुएं से बरामद होती है। यह पैटर्न अब एक बड़े और खतरनाक ट्रेंड का रूप लेता जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में खुले और लावारिस पड़े कुएं अपराधियों के लिए सबसे आसान ठिकाना बन गए हैं, जहाँ हत्या के बाद साक्ष्य छुपाना बहुत आसान हो जाता है।
इन वारदातों के पीछे अलग-अलग कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद से लेकर दुष्कर्म के बाद हत्या जैसे जघन्य अपराध शामिल हैं। हालांकि पुलिस अब तक इन मामलों की तह तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग अब जिला प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने और इन रहस्यमयी घटनाओं की निष्पक्ष जाँच की मांग कर रहे हैं। यदि समय रहते इन घटनाओं पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह "कुआं कनेक्शन" आने वाले दिनों में और भी भयावह रूप ले सकता है, जो पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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