झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नई नियमावली तैयार: जनजातीय भाषा में भूमिज शामिल, भोजपुरी-मगही को जगह नहीं


​झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की नियमावली में बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसका ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस नई नियमावली को आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। नए नियमों के तहत भाषाई प्राथमिकता को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया गया है, जिसमें जनजातीय भाषाओं की सूची में 'भूमिज' को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली को बाहर रखा गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, अब संबंधित जिलों में उन्हीं शिक्षकों की बहाली होगी जो वहां की स्थानीय और जनजातीय भाषाओं के जानकार होंगे।

​शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभाग का लक्ष्य 31 मार्च से पहले जेटेट परीक्षा की तिथि घोषित करना है। उन्होंने बताया कि नई नियमावली पूरी तरह से नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के मानकों के अनुरूप तैयार की गई है। इस बार परीक्षा दो स्तरों पर आयोजित की जाएगी, जिसमें पेपर-1 कक्षा 1 से 5 तक के लिए और पेपर-2 कक्षा 6 से 8 तक के लिए होगा। अभ्यर्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू में से किन्हीं दो भाषाओं के साथ-साथ एक क्षेत्रीय या जनजातीय भाषा की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पासिंग मार्क्स 60% यानी 150 में से 90 अंक तय किए गए हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के लिए यह सीमा 55% रखी गई है।

​राज्य में पिछले 10 वर्षों से जेटेट की परीक्षा न होने के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वर्ष 2016 के बाद से अब तक केवल दो बार ही इस परीक्षा का आयोजन हो सका है, जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत इसे हर साल आयोजित किया जाना अनिवार्य है। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि जब तक जेटेट का आयोजन नहीं होता, तब तक सहायक आचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक बनी रहेगी। नई नियमावली को कैबिनेट से हरी झंडी मिलते ही इसे झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को भेज दिया जाएगा, जिसके बाद परीक्षा की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

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