राँची: 'सात जन्मों का साथ' और 'अग्नि के सात फेरे'—ये शब्द भारतीय समाज में विवाह की पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में झारखंड से आ रही खबरें इन वादों पर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं। राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले दो वर्षों (2024-2026) के भीतर एक दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं, जहाँ पत्नियों ने ही अपने पति की जान ले ली।
इन जिलों में सबसे ज्यादा मामले
आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड के पलामू, गढ़वा, चतरा, बोकारो, राँची और पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जैसे जिले इन घटनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं। पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, इन हत्याओं को अंजाम देने के तरीके भी बेहद खौफनाक थे—कहीं जहर देकर, कहीं गला दबाकर, तो कहीं धारदार हथियारों से वार कर रिश्तों का अंत किया गया।
अपराध के पीछे के मुख्य कारण
विशेषज्ञों और पुलिस जांच में इन घटनाओं के पीछे कुछ प्रमुख कारण निकलकर सामने आए हैं:
• अवैध संबंध: कई मामलों में प्रेम संबंधों के रास्ते से पति को हटाने के लिए साजिश रची गई।
• घरेलू कलह और आर्थिक तनाव: छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े और पैसों की तंगी ने भी हिंसक रूप ले लिया।
• मानसिक दबाव: बदलती जीवनशैली और रिश्तों में संवाद की कमी के कारण बढ़ती असहनशीलता।
झकझोर देने वाली प्रमुख घटनाएं
लेख में कुछ दिल दहला देने वाले उदाहरण दिए गए हैं:
• मार्च 2026 (पलामू): पति को जहर देने के बाद गला दबाकर हत्या।
• सितंबर 2025 (धनबाद): पति की हत्या कर शव को घर में ही दफना दिया गया।
• अक्टूबर 2025 (राँची): जमीन और पैसों के विवाद में साथियों के साथ मिलकर हत्या।
• जुलाई 2025 (सरायकेला): सोते समय हथौड़े से वार कर जान ले ली गई।
समाजशास्त्रियों की चिंता
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ये केवल आपराधिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह समाज में बढ़ती अहिष्णुता और गिरते नैतिक मूल्यों का संकेत हैं। रिश्तों में भरोसे की कमी और बढ़ता अहंकार इन अपराधों की मुख्य जड़ है।
विशेषज्ञों का सुझाव:
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते पारिवारिक विवादों को सुलझाना, सामाजिक जागरूकता फैलाना और काउंसलिंग (परामर्श) जैसी पहल करना अनिवार्य हो गया है।
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