भाषा और रोजगार के मुद्दे पर झारखंड राज्य सहयोगी संघर्ष मोर्चा ने भरी हुंकार

मेदिनीनगर के कचहरी परिसर में झारखंड राज्य सहयोगी संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) से मगही और भोजपुरी भाषा को हटाए जाने के फैसले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की गई। संगठन के सदस्यों ने राज्य सरकार के इस कदम को क्षेत्रीय भाषाओं और उससे जुड़े अभ्यर्थियों के साथ अन्याय करार दिया। इसके साथ ही, राज्य में रुकी हुई नियुक्ति प्रक्रिया को अविलंब शुरू कराने को लेकर एक ठोस रणनीति भी तैयार की गई।

मोर्चा के अध्यक्ष उदय राम ने बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बताया कि रोजगार की आस में राज्य भर के लगभग 36 हजार बेरोजगार युवाओं ने आवेदन किया था, लेकिन सरकार ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। बेरोजगारों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ के खिलाफ मोर्चा ने कड़ा रुख अपनाते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि वे जल्द ही स्थानीय विधायकों और प्रमंडलीय आयुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपेंगे, ताकि उनकी आवाज सत्ता के शीर्ष तक पहुंच सके।

मोर्चा के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा। इस बैठक में अमलेश कुमार चौरसिया, पिंटू कुमार सिंह, इमामुद्दीन अंसारी, महेंद्र राम, लिलेश्वर सिंह, राजा राम सिंह, जितेंद्र प्रसाद और धनंजय यादव समेत कई अन्य सक्रिय सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एकजुटता का परिचय देते हुए एक स्वर में सरकार से भाषा विवाद को सुलझाने और युवाओं के हित में तुरंत नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की पुरजोर मांग की है।

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