मेदिनीनगर: पलामू प्रमंडल मुख्यालय में कृषि विभाग की बदहाली का आलम यह है कि करोड़ों रुपये आवंटित होने के डेढ़ दशक बाद भी विभाग को अपना नसीब नहीं हो सका है। झारखंड सरकार ने संयुक्त कृषि भवन के निर्माण के लिए 15 साल पहले एक करोड़ 65 लाख 77 हजार 124 रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि पूर्व उपायुक्त के आदेश पर भवन निर्माण विभाग ने बुक ट्रांसफर के माध्यम से दो किस्तों में इस राशि की निकासी भी कर ली, लेकिन धरातल पर ईंट तक नहीं रखी गई। रिकॉर्ड के अनुसार, 29 मार्च 2012 को एक करोड़ 29 लाख और 31 मार्च 2013 को शेष 36 लाख 77 हजार रुपये की निकासी कोषागार से की गई थी। इसके बावजूद न तो निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया और न ही सरकारी खजाने में पैसा सरेंडर किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ गई।
वर्तमान में स्थिति यह है कि संयुक्त कृषि भवन के अभाव में जिला कृषि कार्यालय, अनुमंडल कृषि कार्यालय, जिला उद्यान कार्यालय, आत्मा और भूमि संरक्षण समेत कुल छह महत्वपूर्ण विभाग 1935 के बने एक जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं। आजादी के पहले का बना यह 91 साल पुराना ढांचा अपनी मियाद पूरी कर चुका है और कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यहाँ कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि बरसात के दिनों में छत टपकने और दीवारों के गिरने के डर से वे हमेशा सहमे रहते हैं। विडंबना देखिए कि विभाग के पास गुणवत्ता नियंत्रण के लिए 75 लाख की लागत से बना एक नया भवन जरूर है, लेकिन वहां पद स्वीकृत न होने के कारण जांच का काम बंद है और वर्तमान में जिला कृषि पदाधिकारी उसी भवन में बैठने को मजबूर हैं।
प्रशासनिक स्तर पर अब इस योजना को पुनर्जीवित करने की कोशिशें तो शुरू हुई हैं, लेकिन बजट की बढ़ती लागत एक नई बाधा बन गई है। 18 मार्च 2023 को विभाग ने एस्टीमेट को रिवाइज करते हुए तीन करोड़ 97 लाख दो हजार 200 रुपये का नया प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार वर्मा ने स्वीकार किया कि अलग-अलग जगहों पर कार्यालय होने से कामकाज और समन्वय में काफी परेशानी होती है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि यदि प्रस्तावित जी-प्लस टू भवन की स्वीकृति मिल जाती है, तो सभी कार्यालय एक ही छत के नीचे आ जाएंगे, जिससे न केवल कर्मियों को सुरक्षा मिलेगी बल्कि किसानों और आम जनता को भी अपने काम कराने में सहूलियत होगी। फिलहाल, फाइल सरकार की मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है।
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